पिछले वर्ष की सफलता को देखते हुए मंच द्वारा धनबाद तथा जमशेदपुर में पिछले साल की भांति इस साल भी उसी तारिक को सोभा यात्रा निकलने का निर्णय लिया गया है , जहां साल के आखरी दिन यानी 31 दिसंबर को धनबाद में डहरे टुसू का आयोजन होगा जो सरायढेला मड़प थान से चलकर रणधीर वर्मा चौक तक सोभा यात्रा जायेगी वही टाटा जमशेदपुर में 7 जनवरी को डहरे टुसू का आयोजन किया जा रहा है जो डिमना चौक से चलकर आम बगान तक डहरे टुसू सोभा यात्रा निकाली जाएगी,

इसमें आदिवासी और मूलवासी अपने परंपरागत लिवास और हथियारों के साथ नाचते-गाते जुलूस की शक्ल में पैदल निकलेंगे। कार्यक्रम को अनुशासित, यादगार और आनंदमय बनाने और अपनी संस्कृति पर गौरवान्वित होने के लिए डहरे टुसु परब में शामिल होने वाले तमाम लोगों के लिए कुछ नियम बनाये हैं

बता दें कि इसमें अनुशासित ढंग से लोग ढोल-मांदर की थाप पर अपने माथे पर टुसू की प्रतिमा, चौड़ल आदि के साथ शामिल होते है. चूंकि लोगों की भागीदारी काफी अधिक होती है इस कारण यातायात व्यवस्था भी पुलिस के जिम्मे रहती है. पुरुष, महिला, बच्चे अपने-अपने घरों से बाहर निकलकर सड़क पर टुसू मनाने निकलते है. देर शाम तक लोग सड़क पर डटे रहते है.31 दिसंबर का दिन धनबाद शहर के लिए खास होने वाला है। प्रकृति की उपासना करने वाले झारखंडवासी एक अनूठी रैली निकालने जा रहे हैं। यह लगभग आधे शहर का भ्रमण करेगी। इसमें एक लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है। धनबाद शहर में शहरीकरण होने के कारण आज के मूल झारखंडी युवा अपने संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और यहां बसे लोग झारखंड की इस महान संस्कृति से अनिभिज्ञ हैं इसलिए धनबाद शहर में व्यापक रूप से डहरे टुसु का आयोजन 31 दिसंबर को किया गया है।

भव्य शोभायात्रा निकालने की तैयारी में जुटे झारखंडीसुबह 10 बजे से सरायढेला मंडप थान से लेकर रणधीर वर्मा चौक, अम्बेडकर चौक, राजू यादव चौक पूजा टाकीज, सिटी सेंटर चौक होते हुए रणधीर वर्मा चौक तक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें झारखंड की महान संस्कृति की झलक छऊ नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए देखने को मिलेगी। यह आयोजन बृहद झारखंड कला संस्कृति मंच की ओर से किया जा रहा है।आदिवासी समाज में टुसू पर्व का बेहद खास महत्व है। यह पर्व फसल काटने के बाद पौष माह में पूरे एक महीना तक चलने वाली पर्व है। यह पर्व कुंवारी कन्याओं द्वारा मनाया जाता है।
15 दिसंबर को अगहन सक्रांति की स्थापना कर 14 जनवरी को मकर सक्रांति के साथ टुसू पर्व मनाया जाता है। यह पर्व झारखंड के ग्रामीण इलाके में धूमधाम से मनाया जाता है। प्रत्येक दिन संध्या के समय गीत संगीत का दौर चलता है। यह पर्व धान की कृषि से जुड़ा हुआ पर्व है। इस दिन कृषक समुदाय के लोग धान की फसल घर आने की खुशी में महिलायें और लड़कियों टुसु का स्थापना करते है। तथा एक महीने तक चलने वाले इस परब की समाप्ति मकर सक्रांति के दिन नदी में टुसू भाषाण करके किया जाता है
