झारखंड की बहादुर बिटिया को दूसरा सर्वोच्च जीवन रक्षा पदक, काजल के साथ 21 लोगों को मिलेगा पदक, 3 को मरणोपरांत सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक

रांची : झारखंड की बहादूर बिटिया काजल को अदम्य साहस के लिए उत्तम जीवन रक्षक पदक से सम्मानित किया जायेगा। केंद्र सरकार ने जीवन रक्षा के लिए दिये जाने वाले तीन सर्वश्रेष्ठ पुरुस्कारों का ऐलान किया है। सर्वोत्तम जीवन रक्षक पदक के लिए तीन बच्चों का चयन किया गया है। तीनों को मरणोपरांत ये पुरस्कार दिया जायेगा। मास्टर एंथोनी वनमाविया(मिजोरम), मेलोडी लालरेमूर्ति (मिजोरम) और सीआरपीएफ में पदस्थ सूरज आर को ये अवार्ड दिया जायेगा। तीनों ने अपनी जान की बाजी लगाते हुए दूसरे की जान बचायी थी।

वहीं जीवन रक्षा के क्षेत्र में दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार उत्तम जीवन रक्षक पदक कुल 7 लोगों को दिया जायेगा। गोवा के साहिल बिस्सो, झारखंड की काजल कुमारी, तेलंगाना के नवीन कुमार, BRO के विनोद कुमार, रक्षा मत्रालय के हवलदार शेरा राम, NDRF के मुकेश कुमार और NIA के नरेश कुमार को ये अवार्ड दिया जायेगा।

वहीं जीवन रक्षा पदक 21 लोगों को दिया जायेगा। अंडमान निकोबार के अनिल कुमार, आंध्र पदेश के जीतराम राव, आसाम के समरजीत बासुमैत्री, चंडीगढ़ के सुदेश कुमार, केरला के जस्टिन जार्ज, केरला के विल्सन, लद्दाख के पदम थिनलास. महाराष्ट्र के अदिका पाटिल, महाराष्ट्र की पियंका भारत, महाराष्ट्र की सोनाली सुनील , तमिलनाडू की मारिया माइकेल, तमिलनाडू के विजय कुमार, उत्तराखंड के नरेश जोशी, बीआरओ के अर्जुन मल्लिक, बीएसएफ के अमित कुमार सिंह, सीआईएसएफ के शेर सिंह, सीआईएसएफ के सोनू शर्मा, रक्षा मंत्रालय के अब्दुल हमीद, सुनील कुमार मिश्रा और रेलवे के शशिकांत कुमार को अवार्ड दिया जायेगा।

काजल कुमारी ने बचायी थी 3 साल के बच्चे की जानकाजल की बहादुरी के किस्से पर हर किसी को गर्व है। 13 साल की काजल ने अपनी जान की बाजी लगाकर तीन साल के बच्चे की जान बचायी थी। चतरा जिले के हुसैन गांव में 13 साल की काजल कुमारी भुइयां ने तीन साल के बच्चे को बचाने के लिए पानी से भरे गहरे कुएं में छलांग लगा दी। 3 साल का शिवम कुएं के पास खेल रहा था और इसी दौरान वो कुएं में गिर गया। काजल वहीं थी और उसने जैसे ही शिवम को गिरते हुए देखा, तुरंत उसे बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी। इसके बाद उसने शिवम को एक हाथ से पकड़े रखा और दूसरे हाथ से मोटर के पाइप को पकड़ लिया। साथ ही वो ज़ोर ज़ोर से मदद के लिए आवाज़ लगाने लगी। उसकी आवाज़ सुनकर गांववाले इकट्ठा हो गए और फिर सबने मिलकर दोनों को बाहर निकाला। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रस्सी के सहारे दोनों को बाहर निकाला जा सका।

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